up police constable previous year paper in hindi
up police constable 2018 हिंदी
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Q39. निम्न में से कौन-सा शब्द पुल्लिंग है?
- आशा
- आज्ञा
- गरिमा
- सागर
Explanation: 39-(4) हिन्दी भाषा में दो लिंग होते हैं- प्रथम पुल्लिंग तथा द्वितीय स्त्रीलिंग। शब्द के जिस रूप से यह जाना जाय कि वर्णित वस्तु या व्यक्ति पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का, उसे लिंग कहते हैं। आशा, आज्ञा तथा गरिमा स्त्रीलिंग शब्द जबकि सागर पुल्लिंग शब्द है।
Q40. किस शब्द का प्रयोग सदा बहुवचन में होता है?
Explanation: 40-(2) वचन का अभिप्राय संख्या से है। विकारी शब्दों के जिस रूप से उनकी संख्या (एक या अनेक ) का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं। गाय, बहन तथा लता एकवचन शब्द हैं जिनका बहुवचन गायें, बहनें तथा लताएँ होता है। जबकि दर्शन शब्द का प्रयोग सदा बहुवचन में ही किया जाता है।
Q41. निम्नलिखित में सर्वनाम है :
- यह
- सभा
- मनुष्य
- लता
Explanation: 41-(1) संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। जैसे - आप, मैं, हम, वे आदि शब्द सर्वनाम हैं। उपर्युक्त प्रश्न में प्रयुक्त शब्द ‘यह‘ निश्चयवाचक सर्वनाम है।
Q42. निम्नलिखित में विशेषण है :
- शीतलता
- बल
- नया
- वृद्धि
Explanation: 42-(1) संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। शीतलता गुणवाचक विशेषण है।
Q43. ‘सीता सो रही थी।‘ वाक्य का काल है :
- सामान्य भूत
- पूर्ण भूत
- अपूर्ण भूत
- संदिग्ध भूत
Explanation: 43-(3) क्रिया के जिस रूप से कार्य के समय तथा उसकी पूर्णता अथवा अपूर्णता का बोध होता है, उसे काल कहते हैं। ‘सीता सो रही थी।‘ वाक्य अपूर्ण भूतकाल का
Q44. निम्नलिखित में तद्भव है :
- गाँव
- अमृत
- उच्च
- एकत्र
Explanation: 44-(1) ‘गाँव‘ एक तद्भव शब्द है जिसका तत्सम् ‘ग्राम‘ होता है। जबकि अमृत, उच्च तथा एकत्र तत्सम् शब्द हैं जिनका तद्भव क्रमशः इस प्रकार है- अमिय, ऊँचा तथा इकट्ठा।
Q45. निम्नलिखित में तत्सम है :
- गधा
- गाय
- घड़ा
- ग्राहक
Explanation: 45-(4) ‘ग्राहक‘ तत्सम् शब्द है जिसका तद्भव ‘गाहक‘ होता है। जबकि गधा, गाय तथा घड़ा (तद्भव ) का तत्सम क्रमशः गर्दभ, गौ तथा घट होता है।
Q46. ‘जल‘ का पर्यायवाची नहीं है।
- नीर
- समीर
- सलिल
- अम्बु
Explanation: 46-(2) ‘जल‘ के पर्यायवाची शब्द- पानी, नील, सलिल, अम्बु, पयस, वारि आदि हैं। ‘समीर‘ पवन का पर्यायवाची शब्द है।
Q47. ‘जटिल‘ का विलोम होगा :
- कठिन
- रूढ़
- सरल
- मुश्किल
Explanation: 47-(3) जटिल का विलोम सरल होता है।
Q48. ‘वर्ण‘ का अर्थ नहीं होता है :
- अक्षर
- रंग
- जाति
- सुन्दर
Explanation: 48-(4) वर्ण का अर्थ अक्षर, रंग, जाति, कुल आदि होता है। परन्तु वर्ण का अर्थ सुन्दर नहीं होता है।
Q49. ‘जिसे करना बहुत कठिन हो‘ के लिए एक शब्द होगा
- दुष्कर
- पुष्कर
- दुर्जेय
- दुराग्रह
Explanation: 49-(1) ‘जिम करना बहुत कठिन हो‘ के लिए एक शब्द ‘दुष्कर‘ होता है। पुष्कर का अर्थ तालाब या जलाशय होता है। " जिसे जीतना कठिन हो" के लिए एक शब्द दुर्जेय प्रयुक्त किया जाता है। “अनुचित बात के लिए आग्रह " के लिए एक शब्द ‘दुराग्रह‘ प्रयुक्त होता है। -
Q50. ‘अलि-अली‘ का सही अर्थ देने वाला है. शब्द युग्म
- सखी भौंरा
- भौंरा- सखी
- भौंरा-कली
- कली-सखी
Explanation: 50-(2) ‘अलि-अली‘ का सही अर्थ- भौंरा- सखी होता है।
Q51. ‘अपमान‘ में उपसर्ग है :
- अ
- मन
- मान
- अप
Explanation: 51-(4) जो शब्दांश शब्दों के आदि (पहले/पूर्व) में जुड़कर उनके अर्थ में कुछ विशेषता लाते हैं, वे उपसर्ग कहलाते हैं। ‘अपमान‘ में अप उपसर्ग जुड़ा हुआ है।
Q52. ‘घबड़ाहट‘ में प्रत्यय है :
- अट
- हट
- आहट
- राहट
Explanation: 52-(3) जो शब्दांश शब्दों के अंत में जुड़कर उनके अर्थ में विशेषता या परिवर्तन लाते हैं वे प्रत्यय कहलाते हैं। ‘घबड़ाहट‘ में आहट प्रत्यय के रूप में प्रयुक्त है। आहट प्रत्यय लगने से बनने वाले अन्य शब्द इस कसावट, बनावट, लिखावट प्रकार हैं तथा सजावट आदि ।
Q53. ‘परामार्थ‘ का संधि-विच्छेद है :
- परम + अर्थ
- पर + अर्थ
- पर + आर्थ
- परमो + अर्थ
Explanation: 53-(1) परमार्थ का सन्धि विच्छेद ‘परम + अर्थ‘ होता है।
Q54. ‘मैंने यह काम कर लेना चाहिए‘ वाक्य में अशुद्ध अंश है :
- मैंने
- यह
- काम
- कर लेना चाहिए।
Explanation: 54-(1) ‘मैंने यह काम कर लेना चाहिए‘ वाक्य में अशुद्ध अंश ‘मैंने‘ है। वाक्य को शुद्ध बनाने के लिए मैंने के स्थान पर ‘मुझे ‘ का प्रयोग किया जाएगा। अतः शुद्ध वाक्य ‘मुझे यह काम कर लेना चाहिए‘ होगा।
Q55. ‘राजपुत्र‘ में समास है :
- द्विगु
- द्वंद्व
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
Explanation: 55-(4) राजपुत्र में तत्पुरुष समास है।
Q56. ‘आम खाया जाता है।‘ में कौन-सा वाच्य है?
- कर्तृवाच्य
- कर्म वाच्य
- भाव वाच्य
- क्रिया वाच्य
Explanation: 56-(2) " आम खाया जाता है" में कर्म वाच्य है। क्रिया के उस रूपान्तरण को कर्म वाच्य कहते हैं, जिससे वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध होता है। जैसे गीत गाया गया, - लेख लिखा गया, पानी पिया गया आदि ।
Q57. निम्नलिखित में से अव्यय है :
- वर्तमान
- नया
- तथा
- सुन्दर
Explanation: 57-(*) ऐसे शब्द जिनमें लिंग, वचन, पुरुष, कारक आदि के कारण कोई विकार नहीं आता, अव्यय कहलाते हैं। अव्यय के चार भेद होते हैं : (1) क्रिया विशेषण (2) सम्बन्ध बोधक (3) समुच्चय बोधक (4) विस्मय बोधक. उपर्युक्त प्रश्न में तथा समुच्चय बोधक अव्यय है।
Q58. हिन्दी में अल्प-विराम का चिन्ह है :
Explanation: 58-(4) हिन्दी में (,) अल्पविराम (1) पूर्ण विराम, (!) विस्मय बोधक, (?) प्रश्नवाचक आदि चिन्ह होते हैं।
Q59. ‘नाक कटना‘ मुहावरे का अर्थ है।
- खून बहना
- बदनामी होना
- नुकसान होना
- इज्जत करना
Explanation: 59-(2) ‘नाक काटना‘ मुहावरे का अर्थ बदनामी होना होता है।
Q60. ‘काला अक्षर भैंस बराबर‘ लोकोक्ति का सही अर्थ है :
- पढ़ा लिखा न होना
- पढ़ा लिखा होना
- विद्वान होना
- मूर्ख होना
Explanation: 60-(1) ‘काला अक्षर भैंस बराबर‘ लोकोक्ति का अर्थ पढ़ा लिखा न होना अर्थात अनपढ़ होता है।
Q61. अद्भुत रस का स्थायी भाव है :
- क्रोध
- उत्साह
- विस्मय
- भय
Explanation: 61-(3) अद्भुत रस का स्थायी भाव विस्मय होता है। क्रोध रौद्र रस का उत्साह वीर रस का तथा भय-भयानक रस के स्थायी भाव हैं।
Q62. ‘सोरठा‘ के प्रथम चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?
- 10
- 11
- 12
- 13
Explanation: 62-(2) सोरठा में कुल 24 मात्राएँ होती हैं। सोरठा के प्रथम चरण 11 मात्राएँ तथा द्वितीय चरण में 13 मात्राएँ होती हैं।
Q63. निम्नलिखित में कौन-सा शब्दालंकार नहीं है?
- अनुप्रास
- यमक
- श्लेष
- रूपक
Explanation: 63-(4) अलंकार के तीन भेद बताए गए हैं- (1) शब्दालंकार (2) अर्थालंकार तथा (3) आधुनिक या पाश्चात्य अलंकार। अनुप्रास, यमक, श्लेष, लातानुप्रास आदि शब्दालंकार के अन्य रूप हैं। जबकि रूपक उत्प्रेक्षा, उपमा आदि अर्थालंकार के अंतर्गत आते हैं।
Q64. निम्न में से दंत्य ध्वनि है :
- ख
- च
- ल
- फ
Explanation: 64-(3) ल दंत्य ध्वनि है।
Q65. निम्न में से कौन-सा वर्ण अघोष है?
- च
- ज
- झ
- ड
Explanation: 65-(1) च, ट, त आदि अघोष वर्ण है जबकि ज, झ, ङ, ड, ढ, ध आदि सघोष वर्ण हैं।
Q66. निम्न में से कौन-सा शब्द स्त्रीलिंग है?
- सौभाग्य
- सुन्दरता
- काव्य
- चन्द्र
Explanation: 66-(2) सुन्दरता, सौन्दर्य, खूसबू आदि स्त्रीलिंग शब्द हैं। जबकि सौभाग्य, काव्य तथा चन्द्र पुल्लिंग शब्द हैं।
Q67. हुमायूँ में कौन-सा गुण था ?
- कृतज्ञता
- न्यायप्रियता.
- कृपणता
- विश्वसनीयता
Explanation: 67-(1) उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि हुमायूँ में कृतज्ञता का गुण था ।
Q68. ममता दिनभर बाहर क्यों नहीं निकली ?
- उसका घर नहीं था
- वह डरी हुई थी
- शरीर में शक्ति नहीं थी
- घायल थी
Explanation: 68-(2) उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार ममता दिनभर बाहर इस लिए नहीं निकली क्योंकि वह डरी हुई थी।
Q69. निम्नलिखित में से बुढ़िया को क्या नहीं था?
- बुढ़ापा
- खाँसी
- कमजोरी
- सामर्थ्य
Explanation: 69-(4) बुढ़िया में सामर्थ्य नहीं था ।
Q70. अश्वारोही वहाँ क्यों आया था?
- बुढ़िया को ढूँढने के लिए
- मिरजा की तलाश में
- बुढ़िया के छप्पर को ढूँढने
- वहाँ विश्राम करने के लिए
Explanation: 70-(3) अश्वारोही बुढिया के छप्पर को ढूँढने आया था।
Q71. गद्यांश में पथिक किसे कहा है :
- मिरजा को
- मुगलयोद्धा को
- ममता को
- हुमायूँ को
Explanation: 71-(4) उपर्युक्त गद्यांश में पथिक हुमायूँ को कहा गया है।
Q72. ‘भारत-भारती‘ के रचनाकार हैं :
- मैथिलीशरण गुप्त
- रामधारी सिंह ‘दिनकर‘
- जय शंकर प्रसाद
- माखनलाल चतुर्वेदी
Explanation: 72-(1) ‘भारत-भारती‘ के रचनाकार राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हैं। उनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाएँ साकेत, पंचवटी, सिद्धराज, जयद्रथ वध हैं।
Q73. रामधारी सिंह दिनकर को किस कृति पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
- कुरुक्षेत्र
- उर्वशी
- संस्कृति के चार अध्याय *
- रश्मिरथी.
Explanation: 73-(3) रामधारी सिंह दिनकर आधुनिक हिन्दी साहित्य तथा काव्य विधा के अग्रिम पंक्ति के लेखक एवं कवि थे। संस्कृति के चार अध्याय के लिए उन्हें 1959 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जबकि वर्ष 1972 में उन्हें ऊर्वशी नामक काव्य रचना के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
Q74. ‘पद्मावत‘ किसकी रचना है?
- कबीर
- जायसी
- सूरदास
- तुलसीदास
Explanation: 74-(2) पद्मावत मलिक मोहम्मद जायसी की रचना है।
Q75. ‘चन्द्रगुप्त‘ नाटक के रचयिता हैं :
- भारतेन्दु हरिश्चंद्र
- जयशंकर प्रसाद
- मोहन राकेश
- भीष्म साहनी संख्यात्मक एवं मानसिक योग्यता
Explanation: 75-(2) चन्द्रगुप्त नाटक के रचनाकार जयशंकर प्रसाद हैं। भारतेन्दु हरिश्चन्द ने अन्धेर नगरी तथा मोहन राकेश ने आधे-अधूरे नामक प्रसिद्ध नाट्य पुस्तक की रचना की है।