UP Police Constable Previous Year Question Papers pdf with solution year 2020 set 2 hindi
up police constable 2020 हिंदी
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Q1. इनमें से ‘जिसका जन्म अंडे से होता हो‘ को व्यक्त करने वाला कौन-सा एक शब्द है?
- पक्षी
- अंडाणु
- अंडज
- अंत्यज
Explanation: हिंदी व्याकरण में कई शब्दों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग किया जाता है, जिसे “एक शब्द में वाक्य” कहा जाता है। “जिसका जन्म अंडे से होता है” के लिए उपयुक्त शब्द “अंडज” है। अंडज जीव वे होते हैं जो अंडों के माध्यम से जन्म लेते हैं, जैसे पक्षी, सरीसृप आदि। ‘पक्षी’ केवल एक जीव वर्ग को दर्शाता है, जबकि ‘अंडाणु’ जैविकी का एक कोशिकीय शब्द है और ‘अंत्यज’ का अर्थ समाज के निम्न वर्ग से संबंधित होता है। इसलिए सही उत्तर ‘अंडज’ है।
Q2. निम्नलिखित में ‘अमृत‘ का अनेकार्थक/पर्यायवाची शब्द नहीं है-
- स्वर्ण
- पारा
- दूध
- मोती
Explanation: अनेकार्थक या पर्यायवाची शब्द वे होते हैं जिनके अर्थ समान या मिलते-जुलते होते हैं। ‘अमृत’ का अर्थ अमरत्व देने वाला दिव्य रस होता है और इसके कई पर्यायवाची शब्द हैं जैसे– सुधा, सोम, पीयूष, अमिय आदि। सामान्य प्रयोग में स्वर्ण, दूध और पारा को भी रूपक रूप में अमृत के समान मूल्यवान या जीवनदायी माना जाता है। ‘मोती’ का अर्थ सीप से प्राप्त रत्न है और इसका अर्थ ‘अमृत’ से संबंधित नहीं है। इसलिए ‘मोती’ अमृत का अनेकार्थक या पर्यायवाची शब्द नहीं है।
Q3. अमृतलाल नागर के उपन्यास ‘मानस का हंस‘ की कथावस्तु है—
- बुंदेलखंड का सांस्कृतिक जीवन
- ह्रासोन्मुख बुद्धकालीन भारत
- लोरिक-चंदा की लोककथा
- तुलसीदास का मानसिक विकास
Explanation: ‘मानस का हंस’ प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार अमृतलाल नागर का चर्चित उपन्यास है, जिसका प्रकाशन 1972 में हुआ। इस उपन्यास की कथावस्तु महान संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन और उनके मानसिक तथा आध्यात्मिक विकास पर आधारित है। लेखक ने तुलसीदास को एक संवेदनशील, संघर्षशील और लोकधर्मी कवि के रूप में प्रस्तुत किया है। इसमें उनके व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक परिस्थितियों और आध्यात्मिक अनुभवों का चित्रण मिलता है। इसलिए इस उपन्यास की मूल कथावस्तु तुलसीदास के मानसिक और आध्यात्मिक विकास से संबंधित है।
Q4. ‘गंगा मैया‘ उपन्यास के लेखक हैं-
- नागार्जुन
- भैरव प्रसाद गुप्त
- राही मासूम रज़ा
- अब्दुल बिस्मिल्लाह
Explanation: ‘गंगा मैया’ उपन्यास के लेखक भैरव प्रसाद गुप्त हैं। यह उपन्यास हिंदी साहित्य में ग्रामीण जीवन के यथार्थ चित्रण के लिए जाना जाता है। इसमें भारतीय गांवों के सामाजिक संघर्ष, आर्थिक समस्याओं और लोगों के जीवन की वास्तविक परिस्थितियों का सजीव वर्णन किया गया है। भैरव प्रसाद गुप्त प्रगतिशील विचारधारा से जुड़े प्रसिद्ध हिंदी कहानीकार, उपन्यासकार और संपादक थे। उनका जन्म 7 जुलाई 1918 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था। इस कृति में ग्रामीण समाज की समस्याओं और जीवन मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
Q5. निम्नलिखित वाक्य में आए खाली स्थान के लिए सही शब्द चुनिए- आजकल के नौजवानों ने बुजुर्गों की ____ खराब कर रखी है।
- मिट्टी
- बालू
- सूरत
- दिमाग
Explanation: इस वाक्य में सही मुहावरा “मिट्टी खराब करना” है। हिंदी भाषा में मुहावरे ऐसे स्थायी वाक्यांश होते हैं जिनका अर्थ सामान्य शब्दार्थ से अलग होता है। “मिट्टी खराब करना” का अर्थ किसी की प्रतिष्ठा या स्थिति को बिगाड़ देना या दुर्दशा कर देना होता है। दिए गए वाक्य में आशय है कि आजकल के युवाओं के कारण बुजुर्गों की स्थिति खराब हो गई है। इसलिए वाक्य होगा – “आजकल के नौजवानों ने बुजुर्गों की मिट्टी खराब कर रखी है।” अन्य विकल्प वाक्य के मुहावरेदार अर्थ के अनुरूप नहीं हैं।
Q6. ‘चैन की बंसी बजाना‘ मुहावरे का सही अर्थ होगा-
- सुख से रहना
- धीरे-धीरे काम करना
- बात पर अड़े रहना
- प्रतीक्षा करना
Explanation: “चैन की बंसी बजाना” एक प्रचलित हिंदी मुहावरा है। मुहावरे ऐसे वाक्यांश होते हैं जिनका अर्थ शब्दों के सामान्य अर्थ से अलग और विशेष होता है। “चैन की बंसी बजाना” का अर्थ होता है – निश्चिंत होकर सुखपूर्वक जीवन बिताना या बिना किसी चिंता के रहना। जब किसी व्यक्ति को किसी प्रकार की चिंता, परेशानी या जिम्मेदारी नहीं रहती, तब कहा जाता है कि वह चैन की बंसी बजा रहा है। इसलिए दिए गए विकल्पों में “सुख से रहना” इस मुहावरे का सही अर्थ है।
Q7. ‘लोग भूल गए हैं‘ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले कवि हैं-
- गिरिजाकुमार माथुर
- रघुवीर सहाय
- कुँवर नारायण
- त्रिलोचन
Explanation: प्रसिद्ध हिंदी कवि रघुवीर सहाय को उनके कविता-संग्रह “लोग भूल गए हैं” के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। रघुवीर सहाय आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं में सामाजिक चेतना, राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना और आम आदमी के जीवन की समस्याओं का सशक्त चित्रण मिलता है। साहित्य अकादमी पुरस्कार भारत का एक प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान है, जो 1955 से भारतीय भाषाओं की उत्कृष्ट कृतियों के लिए प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। इसलिए सही उत्तर रघुवीर सहाय है।
Q8. प्रस्तुत गद्यांश का शीर्षक होगा-
- हिन्दी साहित्य
- गद्य की विधाएँ
- निबंध क्या है
- रचनात्मक साहित्य
Explanation: गद्यांश के विषय-वस्तु के आधार पर उसका उचित शीर्षक निर्धारित किया जाता है। यदि किसी गद्यांश में निबंध की परिभाषा, उसकी विशेषताएँ, स्वरूप और महत्व का वर्णन किया गया हो, तो उसका सबसे उपयुक्त शीर्षक “निबंध क्या है” होगा। शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे गद्यांश के मुख्य विचार को संक्षेप में व्यक्त करे। इसलिए दिए गए विकल्पों में “निबंध क्या है” सबसे उपयुक्त और सटीक शीर्षक है, क्योंकि यह सीधे गद्यांश के विषय को स्पष्ट करता है।
Q9. हिन्दी में निबंध का प्रारम्भ कब से हुआ?
- भक्तिकाल से
- भारतेन्दु युग से
- द्विवेदी युग से
- छायावाद से
Explanation: हिंदी में निबंध लेखन की परंपरा आधुनिक युग में प्रारम्भ हुई और इसका विकास मुख्यतः भारतेन्दु युग से माना जाता है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक कहा जाता है। उनके समय में हिंदी गद्य की अनेक विधाओं जैसे निबंध, नाटक, पत्रकारिता और आलोचना का विकास हुआ। भारतेन्दु और उनके समकालीन लेखकों ने सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विषयों पर निबंध लिखकर हिंदी गद्य को समृद्ध किया। इसलिए हिंदी में निबंध का प्रारम्भ भारतेन्दु युग से माना जाता है।
Q10. निबंध के संदर्भ में असत्य कथन है-
- निबंध को अंग्रेजी में ‘Essay’ कहा जाता है।
- निबंध के पर्याय रूप में संदर्भ, रचना और प्रस्ताव जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं।
- निबंध शब्द का प्रयोग किसी विषय की तार्किक और बौद्धिक विवेचना के लिए किया जाता है।
- वर्तमान काल के निबंधों में व्यक्तित्व या वैयक्तिकता का कोई महत्व नहीं होता।
Explanation: निबंध गद्य साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है जिसमें किसी विषय पर लेखक अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करता है। अंग्रेजी में निबंध को ‘Essay’ कहा जाता है। निबंध में किसी विषय की तार्किक, बौद्धिक और विचारपूर्ण विवेचना की जाती है। आधुनिक निबंधों की एक प्रमुख विशेषता लेखक की वैयक्तिकता या व्यक्तित्व का स्पष्ट प्रदर्शन है। लेखक अपने अनुभव, विचार और दृष्टिकोण को स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत करता है। इसलिए यह कथन कि वर्तमान काल के निबंधों में व्यक्तित्व या वैयक्तिकता का कोई महत्व नहीं होता, असत्य है।
Q11. आधुनिक मनुष्य का केन्द्रीय भाव है-
- साहित्य
- निबंध
- स्वाधीनता
- इतिहास-बोध
Explanation: आधुनिक युग में मनुष्य की चेतना का सबसे महत्वपूर्ण तत्व स्वाधीनता माना जाता है। आधुनिक समाज में व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता, अधिकारों और व्यक्तिगत निर्णयों को महत्व देता है। यही कारण है कि आधुनिक साहित्य, विचारधारा और सामाजिक आंदोलनों में स्वतंत्रता का भाव प्रमुख रूप से दिखाई देता है। इस भावना के कारण व्यक्ति परंपरागत रूढ़ियों, सामाजिक बंधनों और अन्यायपूर्ण व्यवस्थाओं का विरोध करता है। इसलिए कहा जाता है कि आधुनिक मनुष्य का केन्द्रीय भाव “स्वाधीनता” है।
Q12. भारतेन्दु और उनके युग के संदर्भ में सत्य कथन है-
- गद्य-काव्य विधा का प्रचलन भारतेन्दु से होता है।
- हिन्दी साहित्य में भारतेन्दु और उनके सहयोगियों से निबंध लेखन की परंपरा का आरम्भ हुआ।
- भारतेन्दु युग का निबंध प्राचीन संस्कृत साहित्य के समान ही था।
- भारतेन्दु युग का साहित्य केवल इतिहास-बोध के कारण विकसित हुआ।
Explanation: भारतेन्दु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक माना जाता है। उनके समय को “भारतेन्दु युग” कहा जाता है, जिसमें हिंदी गद्य का व्यापक विकास हुआ। इसी काल में निबंध, नाटक, पत्रकारिता और आलोचना जैसी गद्य विधाओं का विस्तार हुआ। भारतेन्दु और उनके सहयोगियों ने सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विषयों पर निबंध लिखकर हिंदी गद्य को नई दिशा दी। इसलिए यह कथन सत्य है कि हिंदी साहित्य में निबंध लेखन की परंपरा का आरम्भ भारतेन्दु और उनके सहयोगियों से हुआ।
Q13. इनमें से ‘उसी समय का‘ को व्यक्त करने वाला कौन-सा एक शब्द है?
- तत्सम
- तुरंत
- तत्कालीन
- तत्काल
Explanation: हिंदी में कई शब्दों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग किया जाता है, जिसे “एक शब्द में वाक्य” कहा जाता है। “उसी समय का” या “उसी काल से संबंधित” अर्थ को व्यक्त करने के लिए “तत्कालीन” शब्द का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए – “तत्कालीन परिस्थितियाँ” या “तत्कालीन शासन व्यवस्था”। ‘तत्सम’ संस्कृत से यथावत लिए गए शब्दों को कहते हैं, ‘तुरंत’ और ‘तत्काल’ का अर्थ तुरंत या उसी समय होता है, लेकिन “उसी समय का” अर्थ को सही रूप से व्यक्त करने वाला शब्द “तत्कालीन” है।
Q14. कृत-प्रत्ययों के संयोग से बनने वाले रूप को क्या कहते हैं?
- सकर्मक क्रिया
- पूर्वकालिक क्रिया
- कृदंत
- नामधातु
Explanation: व्याकरण में प्रत्यय वे शब्दांश होते हैं जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर उसके अर्थ या रूप में परिवर्तन करते हैं। जब धातु के साथ “कृत प्रत्यय” जुड़ते हैं, तब जो रूप बनता है उसे “कृदंत” कहा जाता है। उदाहरण के लिए – ‘लिख’ धातु से ‘लिखित’, ‘कर’ से ‘कृत’ आदि। कृदंत रूप कभी-कभी विशेषण या संज्ञा के रूप में भी प्रयुक्त होते हैं। हिंदी और संस्कृत व्याकरण में कृदंत का विशेष महत्व है, क्योंकि यह क्रिया से बने हुए रूपों को व्यक्त करता है। इसलिए सही उत्तर “कृदंत” है।
Q15. “श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्रोध से जलने लगे। सब शोक अपना भूलकर करतल युगल मलने लगे। ‘संसार देखे अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े’ करते हुए यह घोषणा वे हो गए उठ कर खड़े।” प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा रस है?
- रौद्र
- वीर
- भयानक
- वीभत्स
Explanation: रस काव्यशास्त्र का महत्वपूर्ण तत्व है, जो पाठक या श्रोता के मन में विशेष भाव उत्पन्न करता है। रौद्र रस का स्थायी भाव ‘क्रोध’ होता है। प्रस्तुत पंक्तियों में श्रीकृष्ण के वचन सुनकर अर्जुन क्रोध से भर उठते हैं और शत्रुओं को युद्ध में पराजित करने की घोषणा करते हैं। यहाँ क्रोध और उग्रता की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है, इसलिए इस पद्यांश में रौद्र रस की अभिव्यक्ति होती है। जब क्रोध, प्रतिशोध या उग्र भाव प्रमुख हो, तब उसे रौद्र रस कहा जाता है।
Q16. निम्नलिखित कौन-सा विकल्प विराम-भेद और उसके चिन्ह को सुमेलित नहीं करता?
- पूर्ण विराम : ।
- अल्पविराम : ,
- योजक चिन्ह : 0
- उद्धरण चिन्ह : “ ”
Explanation: विराम-चिह्न लेखन में अर्थ को स्पष्ट करने और वाक्य में ठहराव दिखाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। पूर्ण विराम (।) वाक्य की समाप्ति को दर्शाता है, जबकि अल्पविराम (,) हल्के विराम के लिए प्रयोग होता है। उद्धरण चिह्न (“ ”) किसी के कथन या विशेष शब्द को दर्शाने के लिए लगाए जाते हैं। योजक चिन्ह का सही चिन्ह (-) होता है, जिसका प्रयोग दो शब्दों को जोड़ने के लिए किया जाता है, जैसे – माँ-बाप, दिन-रात। इसलिए “योजक चिन्ह : 0” गलत मेल है।
Q17. निम्नलिखित वाक्य में आए खाली स्थान के लिए सही शब्द चुनिए- जिसने गुलाबी कमीज पहनी है, ____ नाम श्याम है।
- जिसका
- उसका
- इसका
- किसका
Explanation: वाक्य की संरचना के अनुसार सही सर्वनाम का चयन करना आवश्यक होता है। यहाँ वाक्य है – “जिसने गुलाबी कमीज पहनी है, ____ नाम श्याम है।” इस वाक्य में पहले “जिसने” का प्रयोग हुआ है, इसलिए उसके उत्तर में “उसका” सर्वनाम उपयुक्त होगा। सही वाक्य होगा – “जिसने गुलाबी कमीज पहनी है, उसका नाम श्याम है।” ‘उसका’ संबंधवाचक सर्वनाम है जो पहले बताए गए व्यक्ति की ओर संकेत करता है। इसलिए सही उत्तर “उसका” है।
Q18. ‘चाबुक‘ निबंध संग्रह के रचनाकार हैं-
- प्रेमचंद
- जयशंकर प्रसाद
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला‘
- महादेवी वर्मा
Explanation: ‘चाबुक’ प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का निबंध-संग्रह है। निराला हिंदी साहित्य के छायावाद युग के प्रमुख चार स्तंभों में से एक माने जाते हैं। वे एक महान कवि, निबंधकार और विचारक थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना, विद्रोही भावना और मानवीय संवेदनाएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं। निराला ने कविता के साथ-साथ गद्य साहित्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। ‘चाबुक’ जैसे निबंधों में उन्होंने समाज की कुरीतियों और विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया है।
Q19. भोर, विहान, निशांत निम्नलिखित में से किसके पर्यायवाची शब्द हैं?
- दिन
- शाम
- प्रभात
- संध्या
Explanation: भोर, विहान और निशांत ऐसे शब्द हैं जो प्रातःकाल या सुबह के समय को व्यक्त करते हैं। ये सभी “प्रभात” के पर्यायवाची शब्द हैं। ‘भोर’ का अर्थ है सुबह का आरंभिक समय, ‘विहान’ का अर्थ है सुबह या दिन की शुरुआत, जबकि ‘निशांत’ का अर्थ है रात का अंत। जब रात समाप्त होकर दिन का प्रारम्भ होता है, उसी समय को प्रभात कहा जाता है। इसलिए दिए गए विकल्पों में “प्रभात” इन सभी शब्दों का सही पर्यायवाची है।
Q20. ”तुलसीकृत” शब्द का समास-विग्रह करने पर करण कारक की कौन-सी विभक्ति मिलती है?
- द्वारा
- का
- में
- पर
Explanation: “तुलसीकृत” शब्द का समास-विग्रह करने पर अर्थ होता है – “तुलसी द्वारा कृत” अर्थात तुलसी के द्वारा बनाया गया। यहाँ ‘तुलसी’ कर्ता नहीं बल्कि करण कारक के रूप में प्रयुक्त है, क्योंकि कार्य उसके माध्यम से किया गया है। हिंदी व्याकरण में करण कारक की विभक्ति सामान्यतः “से” या “द्वारा” होती है। इस शब्द के विग्रह में “द्वारा” का प्रयोग स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसलिए “तुलसीकृत” का सही समास-विग्रह “तुलसी द्वारा कृत” है और करण कारक की विभक्ति “द्वारा” है।
Q21. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प वाक्यांश और उनके लिए एक शब्द की सही जोड़ी नहीं है?
- जो बहुत बोलता हो - वाचाल
- जो कुछ नहीं जानता - अज्ञ
- जो मापा न जा सके - अपरिमेय
- जो अनुकरण करने योग्य हो - विश्वसनीयता
Explanation: हिंदी व्याकरण में कई वाक्यांशों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग किया जाता है, जिससे भाषा संक्षिप्त और प्रभावशाली बनती है। “जो बहुत बोलता हो” के लिए “वाचाल”, “जो कुछ नहीं जानता” के लिए “अज्ञ” और “जो मापा न जा सके” के लिए “अपरिमेय” शब्द सही हैं। “जो अनुकरण करने योग्य हो” के लिए सही शब्द “अनुकरणीय” होता है, न कि “विश्वसनीयता”। “विश्वसनीयता” का अर्थ विश्वास के योग्य होना है। इसलिए विकल्प (D) गलत जोड़ी है।
Q22. ‘जो भेदा न जा सके‘ वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
- सर्वशक्तिमान
- लौहपुरुष
- अभेद्य
- दुर्भेद
Explanation: “जो भेदा न जा सके” के लिए उपयुक्त एक शब्द “अभेद्य” है। ‘भेद’ का अर्थ है किसी वस्तु को छेदना या तोड़ना। जब किसी वस्तु को भेदा या नष्ट नहीं किया जा सकता, तो उसे “अभेद्य” कहा जाता है। यह शब्द प्रायः किले, सुरक्षा व्यवस्था या कवच आदि के संदर्भ में प्रयोग किया जाता है। “दुर्भेद” का अर्थ होता है जिसे भेदना बहुत कठिन हो, जबकि “अभेद्य” का अर्थ है जिसे भेदा ही न जा सके। इसलिए यहाँ सही उत्तर “अभेद्य” है।
Q23. व्याल, उरग, पन्नग निम्नलिखित में से किसके पर्यायवाची शब्द हैं?
- भौंरा
- हाथी
- सियार
- साँप
Explanation: व्याल, उरग और पन्नग संस्कृत और हिंदी में प्रयुक्त ऐसे शब्द हैं जो “साँप” के पर्यायवाची हैं। ‘उरग’ का शाब्दिक अर्थ है जो पेट के बल चलता है, ‘पन्नग’ का अर्थ भी सर्प ही होता है और ‘व्याल’ भी विषैले सर्प या भयानक जीव के अर्थ में प्रयुक्त होता है। हिंदी और संस्कृत साहित्य में साँप के लिए कई पर्यायवाची शब्द मिलते हैं, जैसे– भुजंग, विषधर, फणी, नाग आदि। इसलिए दिए गए विकल्पों में “साँप” इन शब्दों का सही पर्यायवाची है।
Q24. ‘यहाँ पढ़ा नहीं जाता‘ वाक्य में कौन-सा वाच्य प्रयुक्त हुआ है?
- कर्मवाच्य
- भाववाच्य
- कर्तृवाच्य
- अवधिवाच्य
Explanation: वाच्य वह रूप है जिससे यह पता चलता है कि वाक्य में कर्ता, कर्म या क्रिया-भाव में से किसकी प्रधानता है। जब वाक्य में न कर्ता की प्रधानता होती है और न ही कर्म की, बल्कि केवल क्रिया के भाव पर जोर होता है, तब उसे “भाववाच्य” कहते हैं। वाक्य “यहाँ पढ़ा नहीं जाता” में यह स्पष्ट नहीं है कि कौन पढ़ता है, बल्कि केवल यह बताया गया है कि यहाँ पढ़ने की क्रिया नहीं होती। इसलिए इस वाक्य में भाववाच्य का प्रयोग हुआ है।
Q25. निम्नलिखित कौन-सा उपन्यासकार ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार‘ से सम्मानित नहीं है?
- जैनेन्द्र कुमार
- भगवतीचरण वर्मा
- मन्नू भंडारी
- अमृतलाल नागर
Explanation: साहित्य अकादमी पुरस्कार भारत का एक प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान है, जो 1955 से विभिन्न भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट कृतियों के लिए दिया जाता है। जैनेन्द्र कुमार, भगवतीचरण वर्मा और अमृतलाल नागर जैसे प्रमुख हिंदी साहित्यकारों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। मन्नू भंडारी हिंदी की प्रसिद्ध कथाकार और उपन्यासकार थीं, जिन्होंने ‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ जैसे प्रसिद्ध उपन्यास लिखे, लेकिन उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त नहीं हुआ। इसलिए सही उत्तर मन्नू भंडारी है।
Q26. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प शब्द और उनके अनेकार्थक शब्दों की सही जोड़ी नहीं है?
- अंक - चिन्ह, गोद
- कोट - किला, एक प्रकार का वस्त्र
- बलि - उपहार, कर
- सर - श्रद्धेय, तालाब
Explanation: अनेकार्थक शब्द वे होते हैं जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं। ‘अंक’ का अर्थ चिन्ह या गोद दोनों हो सकता है। ‘कोट’ का अर्थ किला भी होता है और पहनने का एक प्रकार का वस्त्र भी। ‘बलि’ का अर्थ यज्ञ में दी जाने वाली आहुति या कर भी हो सकता है। लेकिन ‘सर’ का अर्थ सामान्यतः तालाब या जलाशय होता है, जबकि ‘श्रद्धेय’ का अर्थ सम्मान के योग्य व्यक्ति होता है। इसलिए “सर - श्रद्धेय, तालाब” सही अनेकार्थक जोड़ी नहीं है।
Q27. निम्नलिखित में असत्य कथन की पहचान कीजिए-
- व्यंजन वर्गों के तीसरे, चौथे और पाँचवें व्यंजन सघोष होते हैं।
- व्यंजन वर्गों के पहले और दूसरे व्यंजन अघोष होते हैं।
- समस्त स्वर सघोष ध्वनियाँ हैं।
- सभी विसर्ग सघोष हैं।
Explanation: ध्वनिविज्ञान के अनुसार जिन ध्वनियों के उच्चारण में स्वर-तंत्रियों में कंपन होता है, उन्हें सघोष कहा जाता है, जबकि जिनमें कंपन नहीं होता उन्हें अघोष कहा जाता है। व्यंजन वर्गों के पहले और दूसरे व्यंजन अघोष होते हैं तथा तीसरे, चौथे और पाँचवें व्यंजन सघोष होते हैं। सभी स्वर भी सघोष ध्वनियाँ माने जाते हैं क्योंकि उनके उच्चारण में स्वर-तंत्रियों में कंपन होता है। विसर्ग (ः) एक विशेष ध्वनि है और इसे सघोष नहीं माना जाता। इसलिए “सभी विसर्ग सघोष हैं” कथन असत्य है।
Q28. निम्नलिखित में से सही वाक्य की पहचान कीजिए ।
- श्रीकृष्ण के अनेकों नाम हैं।
- श्रीकृष्ण के अनेक नाम हैं।
- श्रीकृष्ण को अनेकों नाम हैं।
- श्रीकृष्ण का अनेक नाम है।
Explanation: शुद्ध वाक्य वह होता है जिसमें व्याकरण के नियमों का सही पालन किया गया हो। “अनेक” शब्द के साथ “नाम” का प्रयोग सामान्य रूप से किया जाता है, इसलिए सही वाक्य है – “श्रीकृष्ण के अनेक नाम हैं।” “अनेकों नाम” का प्रयोग प्रायः अशुद्ध माना जाता है क्योंकि “अनेक” शब्द स्वयं ही बहुवचन का बोध कराता है। अन्य विकल्पों में कारक और वाक्य-रचना की दृष्टि से त्रुटियाँ हैं। इसलिए सही और व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध वाक्य विकल्प (B) है।
Q29. क्रिया का मूल रूप क्या कहलाता है?
- धातु
- कर्म
- उपसर्ग
- प्रत्यय
Explanation: व्याकरण में क्रिया वह शब्द है जिससे किसी कार्य के होने या करने का बोध होता है। क्रिया का जो मूल रूप होता है उसे “धातु” कहा जाता है। उदाहरण के लिए – ‘जाना’, ‘आना’, ‘खाना’, ‘लिखना’ आदि क्रियाओं में ‘जा’, ‘आ’, ‘खा’, ‘लिख’ धातुएँ हैं। धातु में प्रत्यय या अन्य रूप जोड़कर क्रिया के विभिन्न रूप बनाए जाते हैं। इसलिए क्रिया का मूल आधार धातु ही होती है। इस कारण सही उत्तर “धातु” है।
Q30. निम्नलिखित व्यंजनों में नासिक्य व्यंजन है-
- न्
- च्
- ढ़
- श्
Explanation: नासिक्य व्यंजन वे होते हैं जिनका उच्चारण करते समय वायु का प्रवाह नासिका (नाक) से भी निकलता है। हिंदी वर्णमाला में ङ, ञ, ण, न और म को नासिक्य या पंचमाक्षर कहा जाता है। इन ध्वनियों के उच्चारण में नासिका का विशेष योगदान होता है। दिए गए विकल्पों में ‘न्’ एक नासिक्य व्यंजन है। जबकि ‘च्’, ‘ढ़’ और ‘श्’ का उच्चारण मुख्यतः मुख से होता है। इसलिए सही उत्तर ‘न्’ है, जो नासिक्य व्यंजन का उदाहरण है।
Q31. राजेश जोशी को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस रचना पर प्राप्त हुआ?
- दो पंक्तियों के बीच
- नेपथ्य में हँसी
- मिट्टी का चेहरा
- एक दिन बोलेंगे पेड़
Explanation: 31-(1) वर्ष 2002 में कविता संग्रह ‘दो पंक्तियों के बीच’ के लिए राजेश जोशी को साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था।
इनके अन्य काव्य संग्रह ‘एक दिन बोलेंगे पेड़’ और ‘मिट्टी का चेहरा’ हैं।
Q32. सुरेंद्र वर्मा को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस वर्ष प्रदान किया गया था?
- 1992
- 1996
- 2001
- 2005
Explanation: 32-(2) वर्ष 1996 में सुरेन्द्र वर्मा को उनके उपन्यास ‘मुझे चाँद चाहिए’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
सुरेन्द्र वर्मा हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं।
Q33. निम्नलिखित में से सही वाक्य की पहचान कीजिए।
- वह धीमी स्वर बोला।
- वह धीरे स्वर में बोला।
- वह धीमे स्वर में बोला।
- वह धीमा स्वर बोला।
Explanation: 33-(3) सही वाक्य है — “वह धीमे स्वर में बोला।” अन्य वाक्यों में व्याकरणिक अशुद्धि है।
Q34. “मोक्षप्राप्त” शब्द का समास विग्रह करने पर कौन-सी विभक्ति मिलती है?
- के लिए
- से
- द्वारा
- को
Explanation: 34-(4) ‘मोक्षप्राप्त’ का समास विग्रह — ‘मोक्ष को प्राप्त’। अतः यहाँ ‘को’ विभक्ति आती है।
यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जिसमें अंतिम पद प्रधान होता है।
Q35. ‘साँप छछूंदर की गति होना’ मुहावरे का सही अर्थ होगा—
- पछताना
- असमंजस में पड़ना
- घबड़ा जाना
- होश उड़ जाना
Explanation: 35-(2) ‘साँप-छछूंदर की गति होना’ मुहावरे का अर्थ है — ऐसी स्थिति में पड़ना जिसमें कोई निर्णय न ले सके, अर्थात असमंजस में पड़ जाना।
Q36. निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है?
- अनुप्रास – समान व्यंजनों की आवृत्ति
- श्लेष – एक शब्द के दो या अधिक अर्थ
- उत्प्रेक्षा – उपमेय में उपमान की संभावना
- संदेह – जहाँ उपमान में उपमेय का संदेह प्रकट किया जाए
Explanation: 36-(4) यह सुमेलित नहीं है। ‘संदेह अलंकार’ में वस्तु के विषय में संदेह व्यक्त किया जाता है।
जबकि यहाँ दिया गया वर्णन उपमा से संबंधित है।
Q37. ‘भावविलास’ और ‘रसविलास’ कृति के लेखक कौन हैं?
- भूषण
- मतिराम
- पद्माकर
- देव
Explanation: 37-(4) देव रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि थे। उन्होंने ‘भावविलास’, ‘रसविलास’, ‘देवचरित’, ‘भवानीविलास’, ‘प्रेमतरंग’ आदि ग्रंथों की रचना की।